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Monday, September 27, 2021

पांच साल में चोरों ने देश में इतना लूटा जितने में बन सकते थे 10 ‘अटल टनल’

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के शाजापुर में तकरीबन एक साल पहले एक अजीब घटना घटी। शाजापुर के बेहद वीवीआई और सुरक्षित माने जाने वाले होमगार्ड और पुलिस लाइन क्षेत्र स्थित शासकीय बंगले पर चोरों ने धावा बोला। लेकिन वहां पर बदमाश एक चिट्ठी छोड़कर गए। ये चिट्ठी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी और हर जगह इसकी चर्चा होने लगी। बदमाशों ने जो चिट्ठी लिखी थी उसमें लिखा था कि ‘बहुत कंजूस है रे तू, खिड़की तोड़ने की मेहनत भी नहीं मिली, रात खराब हो गई यार…’।

हैरान कर देने वाली रिपोर्ट
मामला आप खुद ही समझ गए होंगे। चोर एक प्रशासनिक कार्यालय में चोरी करने के इरादे से घुसे लेकिन वहां उनको कुछ नहीं मिला। अंत में वो एक चिट्ठी छोड़कर चले गए। लेकिन चोर हर बार खाली हाथ नहीं लौटे। एक चौंकाने वाला आंकड़ा यहां सामने आया है, जिसमें पिछले पांच वर्षों में चोरों, लुटेरों और बदमाशों नें अटल सुरंग की लागत से 10 गुना अधिक सामान चुरा लिया। चोरों ने मोबाइल फोन से लेकर, कार, पशु, आभूषण से लेकर तमाम चीजों पर अपना हाथ साफ किया। 2015 से 2019 के बीच 32,892 करोड़ रुपये के सामान की चोरी हुई है। चौंकाने वाली बात ये है कि चोरी गए सामान में 25 फीसदी से भी कम बरामद हो पाई।

अटल टनल की लागत 3,300 करोड़
अटल टनल की डिजाइन घोड़े की नाल की तरह है। डबल लेन टनल के बनाने में 3,300 करोड़ की लागत आई है। देश की सेनाओं के लिए इसे बेहद अहम माना जा रहा है। यही नहीं, इस टनल के बनने से लेह की दूरी भी कम हो गई है। इसमें हर 150 मीटर पर टेलीफोन और 60 मीटर पर वाटर हाइड्रेंट की सुविधा दी गई है। साथ ही हर 500 मीटर पर इससे निकलने की आपात सुविधा भी है। हर 250 मीटर पर ब्राडकास्टिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों के साथ आटोमेटिक इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम लगा है।

5 राज्यों में 58% चोरियां, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा चोरी
2019 में चुराए गए वस्तुओं के एक राज्य-वार विश्लेषण से पता चलता है कि पांच राज्य – महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में कुल चोरी का 58% हिस्सा हैं। जबकि महाराष्ट्र पांच साल से लगातार शीर्ष पर बना हुआ है, गुजरात कुछ वर्षों में शीर्ष पांच में जगह बनाई है। डेटा से पता चलता है कि घर कीमती सामानों को स्टोर करने के लिए सबसे असुरक्षित जगह हैं। 2019 में चुराई गई वस्तुओं के मूल्य का 63% हिस्सा आवासीय परिसर और रोडवेज से है।

फोर्स को तकनीकि रुप से होना होगा मजबूत
तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी एसआर जांगिड को सभी जानते होंगे। जांगिड ने कुख्यात बावरिया गिरोह के डकैतों को गिरफ्तार करने के लिए एक अभियान का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, ‘इसके दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। पहला पता लगाना और वसूली। अधिकांश अपराधी चोरी का माल तुरंत निपटा देते हैं। लेकिन वसूली बढ़ाने का एक तरीका यह है कि फोर्स को खुद को सही तकनीक से लैस करना होगा।

साल 2019 में बरामद वस्तुओं का मूल्य चोरी की गई संपत्ति के कुल मूल्य का 31% था, जो कि 2018 में 35% से कम है। चोरी हुई संपत्ति की 32,892 करोड़ रुपये की कीमत 2016 में 30% बताई गई थी, जिसमें 2015 की अपेक्षा 18% की वृद्धि देखी गई। 2017 से चुराई गई वस्तुओं का मूल्य घट रहा है।

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