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Sunday, September 19, 2021

दिल्ली दंगा: ‘आरोपियों ने भाजपा नेता और हिंदुत्व के खिलाफ दिए भड़काऊ भाषण’

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नई दिल्ली। सुरक्षाप्राप्त गवाहों ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की पार्षद इशरत जहां, कार्यकर्ता खालिद सैफी और अन्य ने संशोधित नागरिकता कानून के विरूद्ध अपने प्रदर्शन के दौरान शीर्ष भाजपा नेताओं और ‘हिंदुत्व’ के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिये। दिल्ली पुलिस ने अपने आरोपपत्र में यह कहा है। आरोपपत्र में कहा गया है कि संशोधित नागरिकता कानून और सरकार के खिलाफ विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण दिये गये।

आरोपपत्र के अनुसार एक गवाह ने अपने बयान में कहा, ‘ अपने भाषणों के जरिए उन्होंने वहां इकट्ठा हुए लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और हिंदुत्व के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया। इशरत जहां, खालिद सैफी और अन्य ने अपने भाषणों में ‘हिंदुओं से आजादी, ‘मोदी और अमित शाह से आजादी’ का आह्वान किया और कहा कि सरकार हिंदुओं के पक्ष और मुसलमानों के विपक्ष में है।’

यहां सोलह सितंबर को दाखिल किये गये आरोपपत्र में कहा गया है कि सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज किये गये गवाहों के बयानों से खुलासा होता है कि वक्ताओं ने न केवल सीएए के खिलाफ बल्कि सरकार और देश के खिलाफ भी भाषण दिया।

अयोध्या मामले में SC के फैसले पर भी भड़काया

‘स्टूडेंट ऑफ जामिया’ (एसओजे) नामक एक कट्टरपंथी सांप्रदायिक संगठन ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरूद्ध जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के विद्यार्थियों को एकजुट करने के लिए पर्चे बांटे थे। दिल्ली पुलिस ने आरोपपत्र में यह आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि सांप्रदायिक दंगे के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल सरजील इमाम एसओजे के संपर्क में था।

यहां सोलह सितंबर को एक अदालत में दाखिल किये गये आरोपपत्र में पुलिस ने यह आरोप भी लगाया कि ‘मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ जेएनयू’ नामक एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया गया और इमाम उस ग्रुप का मुख्य एवं सक्रिय सदस्य था। पुलिस ने कहा कि चार दिसंबर 2019 को मंत्रिमंडलीय समिति ने नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पेश करने की मंजूरी दी थी।

आरोपपत्र के अनुसार पांच और छह दिसंबर की रात को ‘मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ जेएनयू’ (एमएसजे) बनाया गया था और शरजील इमाम उस ग्रुप का मुख्य एवं सक्रिय सदस्य था। यह ग्रुप इमाम के दिमाग की उपज थी। उसमें दावा किया गया कि इमाम और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विद्यार्थी अरशद वारसी के चैट से खुलासा हुआ कि इमाम एसओजे के संपर्क में था और यह भी कि एमएसजे और एसओजे दिल्ली की विभिन्न मस्जिदों में पर्चे बांट रहे थे।

पुलिस ने आरोप लगाया कि छह दिसंबर, 2019 को एमएसजे ने इस तरह का पर्चा छपवाया ताकि मुसलमानों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हो। आरोपपत्र में कहा गया है कि चैट से यह भी खुलासा हुआ कि छह दिसंबर, 2019 को बांटे गये पर्चे बाबरी मस्जिद मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय द्वारा नौ नवंबर, 2019को दिये गये फैसले के विरूद्ध थे। ये पर्चे जेएमआई के विद्यार्थियों को लामबंद करने के लिए बांटे गये थे। छह दिसंबर को जामिया मस्जिद और निजामुद्दीन में एमएसजे ने पर्चे बंटवाये और उसका मजमून इमाम ने लिखा था, जिसका एसओजे के अरशद वारसी के साथ उसके चैट से खुलासा हुआ।

किया था ‘गुरिल्ला रणनीति’ को अपनाने का फैसला

दंगे के ‘प्रमुख षडयंत्रकारियों’ ने नरसंहार के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराने के लिए ‘गुरिल्ला रणनीति’को अपनाने का फैसला किया था। पुलिस ने आरोप पत्र में यह दावा किया है। दिल्ली की अदालत में 16 सितम्बर को दाखिल आरोप पत्र में पुलिस ने आरोप लगाया कि जब ‘दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप’ (डीपीएसजी) के कुछ सदस्यों ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की और उनकी आतंकवादी गतिविधियों को उजागर करने की धमकी दी तो षड्यंत्रकारी घबरा गए।
आरोप पत्र में दावा किया गया है कि ‘प्रमुख साजिशकर्ताओं’ द्वारा की गई हिंसा से ‘असंतुष्ट और निराश’ डीपीएसजी व्हाट्सएप समूहों के कुछ सदस्यों ने डीपीएसजी समूह के उन सभी दोषियों को बेनकाब करने की धमकी दी जो इन दंगों के लिए जिम्मेदार है।’ इसमें दावा किया गया है, ‘फेसबुक पोस्ट और व्हाट्सएप बातचीत उन तथ्यों को स्थापित करते हैं, कि जेएनयू के छात्र शरजील इमाम ने खुद को कभी भी विरोध से अलग नहीं किया था।’

गौरतलब है कि नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई हिंसा के बाद गत 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 अन्य घायल हुए थे।

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