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Wednesday, September 15, 2021

NCERT का दावा- मुगलों ने करवाए मंदिरों की मरम्मत, सबूत मांगने पर कहा- कोई जानकारी नहीं

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नई दिल्ली। क्या पाठ्य पुस्तकों में मुगलकाल को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है? क्या हिंदू राजाओं के कालखंड को कम आंका गया है? इस तरह के सवाल देश के बौद्धिक वर्ग के बीच अक्सर उठते रहते हैं। हाल ही में इसको लेकर शिवांक वर्मा नाम के एक छात्र ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) से इसी से संबंधित कुछ सवाल पूछे हैं। एनसीईआरटी ने इसको लेकर जो जवाब दिया है, वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

शिवांक वर्मा ने आरटीआई के जरिए एनसीईआरटी से दो सवाल पूछे थे। उनका पहला सवाल था कि बारहवीं की कक्षा में पढ़ाए जाने वाली किताब (थीम्स ऑफ इंडियन हिस्ट्री पार्ट-2) में दावा किया गया है कि शाहजहां और औरंगजेब के शासनकाल में युद्ध के दौरान जब मंदिर टूटे तो उनकी मरम्मत के लिए भी धन दिए गए। इसका स्रोत क्या है? दूसरा- यह भी बताएं कि औरंगजेब और शाहजहां ने कितने मंदिरों की मरम्मत करवाए?

इस सवाल के जवाब में NCERT की ओर से कह दिया गया कि विभाग के पास मांगी गई जानकारी के संबंध में फाइल में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है।

शिवांक वर्मा ने पिछले साल सितंबर या अक्टूबर में  मैंने NCERT से आरटीआई के जरिए सवाल पूछा था कि 12वीं की इतिहास की किताब में किए गए इस दावे का क्या आधार है कि युद्ध में मंदिरों के टूटने पर भी शाहजाहां और औरंगजेब ने इनकी मरम्मत के लिए फंड्स जारी किए थे। और, ऐसे कितने मंदिर हैं जिनकी मरम्मत शाहजहां और औरंगजेब ने करवाई थी।

नैशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर के छात्र शिवांक को NCERT ने जवाब दिया था कि पाठ्यपुस्तक में किए गए इन दावों का उसकी फाइल में कोई रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में 12वीं क्लास में पढ़ते समय ही इन दावों के लेकर मन में सवाल उठा था और इसलिए मैंने आरटीआई दायर करके NCERT से इस बारे में पूछा था।

दूसरी तरफ, टेक्स्ट बुक्स में सुधारों के मुद्दे पर शिक्षा पर संसद की स्थायी समिति की मीटिंग में भी बुधवार को भारतीय इतिहास की पाठ्य पुस्तकों  में मुगलकाल का मुद्दा छाया रहा। स्थायी समिति की मीटिंग के एजेंडे में पाठ्यक्रम की किताबों से गैर-ऐतिहासिक तथ्यों की समीक्षा करना था। बुधवार को पैनल ने एनसीईआरटी के पूर्व डायरेक्टर जगमोहन सिंह राजपूत और शंकर शरण का पक्ष सुना।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय शिक्षा मंडल और शिक्षा संस्कृति न्यास से जुड़े दोनों शिक्षाविदों ने पैनल से कहा कि मुगलकाल और हिंदू राजाओं के कालखंड को किताब में मिली जगह में संतुलन की जरूरत है। इन्होंने कहा कि मुगलकाल के तथ्यों को सही संदर्भों में पेश करने  की जरूरत है। आक्रमणकारी के रूप में इनकी भूमिका पर पाठ्यपुस्तकों में कुछ भी नहीं है। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने यह भी कहा कि बच्चों को वैदिक काल और उसके बाद के कालखंड की भारतीय संस्कृति के बारे  में बताने और हमारी पाठ्य पुस्तकों पर से वामपंथी इतिहासकारों के प्रभाव को तथ्यों के आईने में सही करने की जरूरत है।

 

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